Wednesday, June 22, 2016

315. बदल सा गया

इक पल को मूंदी पलकें तो ज़माना बदल सा गया
क्या पता बदली नज़रिया या नज़ारा बदल सा गया

वो गली मिली ही नहीं जिससे था गुज़रना मुझे
अब बताते है सब मुझे के वो नक़्शा बदल सा गया

भटकी राहों को सज़ा दो, ख़ाता रही की नहीं
गुम था, खबर न हुई - कब रास्ता बदल सा गया

हाथ हाथों में है, मैने सर उठाया, देखा
साथ मेरे कोई और है,प्यार मेरा बदल सा गया

तुम मिले हो फिर भी है मुझे क्यों इंतेज़ार तेरा
लगता क्यों है, तुम तुम नहीं, चेहरा बदल सा गया

कितने दफ़ा दिल लगाया; हूँ ख़फा दिल ही से अब
हर दफ़ा बेवफा दिल का इरादा बदल सा गया

आदतें बनाना छोड़ना बात आसाँ तो नहीं
गिला है क्यों मेरा जहाँ यूँ दुबारा बदल सा गया

दास्ताँ होगी ख़त्म अब ये मुझे यकीं तो नहीं
ऐसे में क्या बयाँ करूँ, क्या क्या बदल सा गया

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Mar 2007
:) Change is the only constant!? (as are meter issues)

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